ये मैं किससे चुद गयी?



loading...

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिया है। मैं अपनी फ्रेंड की शादी मैं आई हुई थी और वहां जब सोने गयी तो एक अनजान लड़के ने आकर मेरे साथ जो किया मुझे आज भी यकीं नहीं होता। कहीं मेरी गलती भी थी। धमाकेदार stranger sex stories पढ़िए..

”मोना!”
मैं एकदम चौंक पड़ी। अभी कुछ बोलती ही कि एक हाथ आकर मेरे मुँह पर बैठ गया। कान में कोई फुसफुसाया – ”’जानेमन, मैं हूँ, तरुण। कितनी देर से तुम्हारा इंतजार कर रहा था।”

मैं चुप। तरुण, वही स्मार्ट-सा छोरा जो लडकियों के बहुत आगे पीछे कर रहा था। मैं दम साधे लेटी रही। कमरे के अंधेरे में वह मुझे मोना समझ रहा है।

”मुझे यकीन था कि तुम आओगी। एक एक पल पहाड़ सा बीत रहा था तुम्हारे इंतजार में। तुमने मुझे कितना तडपाया।”

मेरा कलेजा जोरों से धड़क रहा था। कुछ बोलना चाहती थी मगर बोल नहीं फूट रहे थे। मोना गुपचुप यह किसके साथ चक्कर चला रही है?। मुझे तो वह कुछ बताती नहीं थी! मेरे सामने तो वह बड़ी अबोध और कड़ी बनती थी। इस कमरे में आज उसे सोना था। मगर वह दूल्हे को देखने मंडप चली गई थी। मुझे नींद आ रही थी और रात ज्यादा हो रही थी। इसलिए उसी के कमरे में आकर सो गई थी। चादर ढँके बिस्तर पर दूसरा कौन सो रहा है देखा नहीं। सोचा कोई होगी। शादी के घर में कौन कहाँ सोएगा निश्चित नहीं रहता। अभी लेटी ही थी कि यह घटना।

“मोना जानेमन, तुम कितनी अच्छी हो जो आ गई।” उसका हाथ अभी भी मेरा मुँह बंद किए था। “आइ लव यू।” उसने मेरे कान में मुँह घुसाकर चूम लिया। चुंबन की आवाज सिर से पाँव तक पूरे बदन में गूँज गई। मैं बहरी-सी हो गई। कलेजा इतनी जोर धडक रहा था कि उछलकर बाहर आ जाएगा। मन हो रहा था अभी ही उसे ठेलकर बाहर निकल जाऊँ। मगर डर और घबराहट के मारे चुपचाप लेटी रही।

वह मेरी चुप्पी को स्वीकृति समझ रहा था। उसका हाथ मेरे मुँह पर से हट गया। उसने अपनी चादर बढ़ाकर मुझे अंदर समेट लिया और अपने बदन से सटा लिया। उसके सीने पर मेरे दिल की घड़कन हथौडे की तरह बजने लगी। “बाप रे कितनी जोर से धड़क रहा है।” उसने मानों खुद से ही कहा। मुझे आश्वस्त करने के लिए उसने मुझे और जोर से कस लिया। “जानेमन आई लव यू, आई लव यू। घबराओ मत।”

मेरा मन कह रहा था रिया, अभी समय है, छुड़ाओ खुद को और बाहर निकल जाओ। शोर मचा दो। तब यह समझेगा कि चुपचुप लड़की को छेड़ने का क्या नतीजा होता है। शादी अटेन्ड करने आया है या यह सब करने! मगर अब उससे जोर लगाकर छुड़ाने के लिए हिम्मत चाहिए थी। एक तरफ निकल जाने का मन हो रहा था दूसरी तरफ यह भी लग रहा था कि देखूँ आगे क्या करता हैं। डर, घबराहट और उत्सुकता के मारे मैं जड़ हो रही।

उसका हाथ मेरी पीठ पर घूम रहा था। गालों पर उसकी गर्म साँसें जल रही थीं। मुझे पहली बार किसी पुरुष की साँस की गंध लगी। वह मुझे अजीब सी लगी। हालाँकि उसमें कुछ भी नहीं था। पर वह मुझे वह बुरी भी नहीं लगी। वह मेरी किंकर्तव्यमूढ़ता का फायदा उठा रहा था और मुझे आश्चर्य हो रहा था कि मैं कुछ कर क्यों नही रही! मुझे उसे तुरंत धक्का देकर बाहर निकल जाना चाहिए था और उसकी करतूत की अच्छी सजा देनी चाहिए थी। मैंने सोच लिया अब और नहीं रुकूंगी। मैं छूटने के लिए जोर लगाने लगी। अब चिल्लाने ही वाली थी … कि तभी उसके होंठ ढूंढते हुए आकर मेरे मुँह पर जम गए। मैं कुछ बोलना चाह रही थी और वह मेरे खुलते मुँह में से मेरी साँसें खींचते मुझे चूम रहा था। मेरी ताकत ढीली पड़ने लगी। दम घुटने लगा। मुझे निकलना था मगर लग रहा था मैं उसकी गिरफ्त में आती जा रही हूँ। मेरे दोनों हाथ उसके हाथों के नीचे दबे कमजोर पड़ने लगे। मैं छूटना चाहती थी मगर अवश हो रही थी।

उसका हाथ पीछे मेरी पीठ पर ब्रा के फीते से खेल रहा था। कब उसने पीछे मेरे फ्रॉक की जिप खोल दी थी मुझे पता नहीं चला। उसका हाथ मेरी नंगी पीठ पर घूम रहा था और ब्रा के फीते से टकरा रहा था। पहली बार किसी पुरुष की हथेली का एक रूखा और ताकत भरा स्पर्श । मैं जड़ रहकर अपने को अप्रभावित रखना चाह रही थी मगर उसके घूमते हाथों का सहलाव और बदन पर बाँहों के बंधन का कसाव मुझे अलग रहने नहीं दे रहे थे। मुझे यह सब बहुत बुरा लग रहा था मगर अस्वीकार्य भी नहीं। मैं सोच भी नहीं सकती थी कि कभी यह सब मैं अपने साथ होने दूंगी। मगर …

वह मेरे ब्रा के फीते को खोलने की कोशिश कर रहा था मगर हुक खुल नहीं रहा था। बेसब्र होकर उसने दोनो तरफ फीतों को जोर से झटके से खींच दिया। हुक टूट गया और फीते अलग हो गए। मुझे अपने बगलों और छाती पर ढीलेपन का, मुक्ति का एहसास हुआ। मैंने एक साँस भरी।

अभी तो वह बस पीठ छूकर ही पागल हो रहा था। आगे क्या होगा!

ye main kisse chud gayi stranger sex stories
वो कौन था? मैं कौन थी??

उसके होंठ मेरे होंठों से उतरकर गले पर आ रहे थे। उसके सांसों की सोंधी गंध दूर चली गई। वह फ्राक को कंधों पर से छीलने की कोशिश कर रहा था। मेरी एक बांह फ्राक से बाहर निकालकर उसने उसे मेरे सिर के ऊपर उठा दिया और उस हाथ को ऊपर से सहलाते हुए नीचे उतरकर मेरे बगल को हथेली में भर लिया। गर्म और गीली काँख पर उसका भरा भरा कसाव मादक लग रहा था। मुझसे अलग रहा नहीं जा रहा था। पहली सफलता से उत्साहित होकर उसने मुझे बाँहों में लपेटे हुए ही थोड़ा दूसरे करवट पर लिया और थोड़ी कोशिश से फ्राक की दूसरी बाँह भी बाहर निकाल दी। मेरे दोनो हाथों को ऊपर उठाकर उसने अपने हाथों में बांध लिया और मेरे बगलों को चूमने लगा। उसके गर्म नमकीन पसीने को चूसने चाटने लगा। उसकी इस हरकत पर मुझे घिन आई मगर मुझे गुदगुदी हो रही थी और नशा-सा भी आ रहा था। मुझे नहीं मालूम था कि बगलों का चूमना इतना मादक हो सकता है। मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश बंद कर दी। मेरी सासें तेज होने लगीं। वह खुशी से भर गया। उसे यकीन हो गया कि अब मैं विरोध नहीं करूंगी। उसने मुझे सहारा देकर बिठाया और फ्राक सिर के ऊपर खींच लिया। ब्रा मेरी छाती पर झूल गई। उसने उसके फीते कंधों पर से सरकाकर ब्रा को निकालना चाहा मगर मैंने स्तनों को हाथों से दबा लिया। हाथों पर ब्रा के नीचे मुझे अपनी चूचियों की चुभन महसूस हुई। मेरी चूचियाँ टाइट होकर होकर खड़ी हो गई थीं। मैं शर्म से गड़ गई।

उसने मुझे धीरे धीरे लिटा दिया। मेरे हाथ छातियों पर दबे रहे। वह अब ऊपर से ही मेरे छातियों पर दबे हाथों को और ऊपर नीचे की खुली जगह को इधर से उधर से चूमने लगा। दबकर मेरे उभारों का निचला हिस्सा हाथों के नीचे थोड़ा बाहर निकल आया था। उसने उसमें हलके से दाँत गड़ा दिया। चुभन के दर्द के साथ एक गनगनाहट बदन में दौड़ गई और छातियों पर हाथों का दबाव ठहर नही सका। तभी उसने ब्रा नीचे से खीच ली और मेरे हाथों को सीधा कर दिया। अब मैं कमर के ऊपर बिल्कुल नंगी थी। गनीमत थी कि अंधेरा था और वह मुझे देख नहीं सकता था। उसके हाथ मेरी छातियों पर घूम रहे थे। उसने चूचियों को चुटकियों में पकड लिया और हलके से मसल दिया। मैं कराह उठी। आह, ये क्या हो रहा है! यह सब इतना विह्वल कर देने वाला क्यों है! उसने झुककर मेरे मुँह पर चूम लिया। मुझे उसके होठों पर अपने बगलों के नमकीन पसीने का स्वाद आया। मैंने उसके होठों को चाट लिया। वह मेरी इस नटखट हरकत पर हँसा और तडातड कई चुम्बन जड दिये।

वह अब नीचे उतरा और मेरी एक चूची को मुँह में भरकर चूसने लगा। मैं गनगना उठी। एक क्षण के लिए वह एक बच्चे का सा खयाल मेरे मन में घूम गया और मैंने उसका सिर अपने स्तन पर दबा लिया। लग रहा था चूचियों से तरंगें उठकर सारे बदन में दौड़ रही हैं। वह कभी एक निपुल को चूसता कभी दूसरे को। मुँह के हँटते ही उस निपुल पर ठंडक लगती और उसी समय दूसरी चूची पर गर्माहट और होंठों के कसाव का एहसास मिलता। मैं अपने जांघों को आपस में रगड़ने लगी। मेरी जोर से चलती सांसों से उपर नीचे होती छातियाँ मानों खुद ही उसे उठ उठकर बुला रही थीं।

अब वह मेरी नाभि को चूम रहा था। मानों उसके छोटे से छेद के भीतर से किसी को बुला रहा हो। इच्छा हो रही थी वहीँ से उसे अपने भीतर उतार लूँ। अपने बहुत भीतर, गर्भ के अंदर में सुरक्षित रख लूँ। मुझे एकाएक भीतर बहुत खाली सा लगा – आओ, मुझे भर दो। उसने बिना भय के मेरी शलवार की डोरी खींच ली और ढीली शलवार के भीतर हाथ डालकर मेरे फूले उभार को दबाने लगा। मेरी पैंटी गीली हो रही थी। उसने पैंटी के ऊपर से भीतर के कटाव को उंगलियों से ट्रेस किया और कटाव की लम्बाई पर उंगली रखकर भीतर दबा दिया। मैं सिहर उठी। बदन में बिजली की तरंगें दौड़ रही थीं। अब उसने पैंटी के भीतर हाथ घुसेड़ा और मेरे चपचपाते रसभरे कटाव में उंगली घुमाने लगा। उंगली घुमाते घुमाते उसने शिखर पर सिहरती नन्हीं कली को जोर से दबाकर मसल दिया। मैं ओह ओह कर हो उठी। मेरी कली उसकी उंगली के नीचे मछली सी बिछल रही थी। मैं अपने नितंब उचकाने लगी। उसने एक उंगली मेरी छेद के भीतर घुसा दी और एक से वह मेरी कली को दबाने लगा। छेद के अंदर की दीवारों को वह जोर जोर से सहला रहा था। अब उसकी हरकतों मे कोमलता समाप्त होती जा रही थी। बदन पर चूँटियाँ रेंग रही थीं। लगता था तरंगों पर तरंगें उठा उठाकर मुझे उछाल रही हैं। योनि में उंगलियाँ चुभलाते हुए उसने दूसरे हाथ से मेरे उठते गिरते नितंबों के नीचे से शलवार खिसका दी। उसके बाद पैंटी को भी बारी बारी से कमर से दोनों तरफ से खिसकाते हुए नितम्बों से नीचे सरका दिया। उंगलियाँ मेरे अंदर लगातार चलाते हुए उसने मेरी पैंटी भी खींचकर टांगों से बाहर कर दी। कहाँ तो मैंने उसे अपने स्तन उघाड़ने नहीं दिया था कहाँ अब मैं खुद अपनी योनि खोलने में सहयोग दे रही थी। मैं चादर के भीतर मादरजाद नंगी थी।

अब मुझे लग रहा था वह आएगा। मैं तैयार थी। मगर वह देरी करके मुझे तड़पा रहा था। वह मुझे चूमते हुए नीचे खिसक रहा था। नाभि से नीचे। कूल्हों की हडिडयों के बीच, नर्म मांस पर। वहाँ उसने हौले से दाँत गड़ा दिए। मैं पागल हो रही थी। वह और नीचे खिसका। नीचे के बालों की शुरूआत पर। अरे उधर कहाँ। मैंने रोकना चाहा। मगर विरोध की संभावना कहाँ थी। सहना मुश्किल हो रहा था। वह उन बालों को चाट रहा था और बीच बीच में उन्हें मुँह में लेकर दाँतों से खींच रहा था। फिर उसने पूरे उभार के माँस को ही मुँह फाड़कर भीतर लेते हुए उसमें दाँत गड़ा दिये। मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई। दर्द और पीड़ा की लहर एक साथ। ओह ओह। अरे यह क्या! मुझे कटाव के शिखर पर उसकी सरकती जीभ का एहसास हुआ। मैंने जांघों को सटाकर उसे रोकना चाहा। मगर वह मेरे विरोध की कमजोरी को जानता था। उसने कुछ जोर नहीं लगाया, सिर्फ ठहर गया। मैंने खुद ही अपनी टांगें फैला दी। वह मेरी फाँक को चाटने लगा। कभी वह उसे चूसता कभी चाटता। कभी जीभ की नोक नुकीली और कडी क़रके कटाव के अंदर घुसाकर ऊपर से नीचे तक जुताई करता। कभी जीभ साँप की तरह सरकती कभी दबा दबा कर अपनी खुरदरी सतह से सरेस की तरह रगड़ती। उसके तरकस में तीरों की कमी नहीं थी। पता नहीं किस किस तरह से वह मुझे पागल और उत्तेजित किए जा रहा था। अभी वो जीभ चौड़ी करके पूरे कटाव को ढकते हुए उसमें उतरकर चाट रहा था। मेरे दोनों तरफ के होंठ फैलकर संतरे की फांक की तरह फूल गए थे। वह उन्हें बारी बारी से मुँह में खींचकर चूस रहा था। उनमें अपने दाँत गड़ा रहा था। दाँत के गड़ाव से दर्द और दर्द पर उमड़ती आनंद की लहर में मैं पछाड़ खा रही थी। मेरा रस बह बह कर निकल रहा था। उसने मेरी थरथराती नन्हीं कली को होठों में कस लिया और उसे कभी वह दाँतों से, कभी होंठों से कुचलते हुए जोर जोर से खींच खींचकर चूसने लगा। मै आपे से बाहर हो उठी। आह! आह! आह! अरे? अरे? अरे? …… जा… जा… जा…। मैं बांध की तरह फूट पड़ी। सदियों से जमी हुई देह मानों धरती की तरह भूकंप में हिचकोले खाने लगी। उसने उंगलियों से खींच कर छेद को दोनों तरफ से फैला दिया और उसमें भीतर मुँह ओप कर मेरा रस पीने लगा। कुंआरी देह की पहली रसधार। सूखी धरती पर पहली बारिश सी। वह योनि के भीतर जीभ घुसाकर घुमा घुमाकर चाट रहा था। मानों कहीं उस अनमोल रस की एक बूंद भी नहीं छोड़ना चाहता हो। मैं अचेत हो गई।

कुछ देर बाद जब मुझे होश आया तो मैंने अपने पर उसका वजन महसूस किया। मैंने हाथों से टटोला। वह मुझपर चढ़ा हुआ था। मेरी हाथों की हरकत से उसे मेरे होश में आने का पता चला। उसने मेरे मुँह पर अपना मुँह रख दिया। एक तीखी गंध मेरे नथुनों में भर गई। उसके होठों पर मेरा लिसलिसा रस लगा था। मैंने खुद को चखा। एक अजीब सा स्वाद था – नमकीन, तीखा, बेहद चिकना। मैं उसके गंध में डूब गई। उसने सराबोर होकर मुझे पिया था। कोई हिचक नहीं दिखाई थी कि उस जगह पर कैसे मुँह ले जाए। मेरा एक एक पोर उसके लिए प्यार के लायक था। एक कृतज्ञता से मैं भर उठी। मैंने खुद उसे विभोर होकर चूमा और उसके होठों को, गालों को अगल बगल सभी को चाटकर साफ कर दिया। अंधेरे में मैंने खुद को उसके हवाले कर दिया था। मुझे कोई दुविधा नहीं थी। वह मुझे मोना समझकर कर रहा था। मैं उसका आनंद बिना किसी डर के ले रही थी। मैंने उसे बाँहों में कस लिया।

और तब मुझे पता चला की मेरी जांघों पर कोई मोटी चीज गड़ रही है। जांघों के बीच इधर उधर फिसलती हुई कुछ खोज रही है। फिर वह मेरे दरार में उतरी और वहॉ के चिकने रस में फिसलकर दबाव में एकदम नीचे उतरकर गुदा के छेद पर दस्तक दे गई। मेरे भीतर चेतावनी दौड़ गई। अब आगे बढ़ने में खतरा है। अब वह असली काम पर आ गया था। वह घटना जिसका हर लड़की अपने यौवन में विवाह तक इंतजार करती है और जिसे सिर्फ अपने पति के लिए बचाकर रखना चाहती है। अबतक जो हुआ था वह एक एडवेंचर के रूप में लिया जा सकता था। मगर अब इसके बाद जो होगा उसका अधिकार सिर्फ मेरे तन मन के स्वामी को ही था। जिसे मैं सपनों के राजकुमार को अर्पित करना चाहती थी। मगर रोकना कैसे हो। अबतक जो हुआ है उसके बाद उसे किस तरह रोकूँ। मैं सम्पूर्ण निर्वस्त्र थी। उसने न केवल केवल मेरे बदन को छुआ था बल्कि उसके रहस्य की अंतिम सीमा तक गया था और मेरे सबसे गुप्त अंग में मुँह घुसाकर मेरे पहली बार फूटे कुँआरे रसको भी पीया था, जिसका स्वाद इसके पहले मैंने भी नहीं जाना था। वह मुझपर छाया हुआ था। मैं उसके नीचे ढँकी थी। कुदरत अब मुझसे अपना हिस्सा मांग रही थी जिसके लिए उसने मुझे जन्म के बाद से ही तैयार किया था। उसका शिश्न ढूंढ रहा था। मेरी योनि भी उससे मिलने को बेकरार थी, मुझे आगे बढ़ने के लिए ठेल रही थी। । मैंने अंधेरे को ओट देने के लिए धन्यवाद दिया। वही मेरी मदद कर रहा था। मैंने संयम की लगाम छोड़ दी। नियति का घोड़ा जिधर ले जाए।

वह थोड़ा ऊपर उठा और मुझपर से नीचे उतरा। उसने मेरे पाँव घुटनों से मोड़ दिये और घुटनों को किताब के पन्नों की तरह फैला दिया। गंतव्य को टटोला। लिंग को हाथ से पकड़कर छेद के मुँह पर लाया। वहाँ उसने ऊपर नीचे रगड़कर रस में अच्छी तरह भिंगोया। मैं दम साधे प्रतीक्षारत थी। क्या करता है। मेरे पैरों के पंजे मेरे नितम्बों के पास नमस्कार की मुद्रा में जुड़े थे। वह लिंग के मुंह को मेरे छेद पर लाकर टिकाया और हल्के से ठेला। तब मुझे उसके थूथन के मोटेपन का पता चला और मैं डर गई। इतना मोटा मेरे छोटे छेद के अंदर कैसे जाएगा? मेरे छेद का मुँह फैला और उसपर आकर उसका शिश्न टिक गया। अब उसके इधर उधर फिसल जाने का डर नहीं था। शिश्न को वहीं टिकाए उसने हाथ हटाया और मेरे उपर झुक गया। मेरे बगलों के नीचे हाथ घुसाकर उसने मेरे कंघों को उपर से जकड़ लिया। उसके वजन से ही शिश्न अंदर धँसने लगा।

अब मैं जा रही थी। लुट रही थी। चोर मेरा सबसे अनमोल मेरे हाथों से ही धीरे धीरे छीन रहा था। मेरे राजीनामे के साथ। और मैं कुछ नहीं कर रही थी। विरोध नहीं करके उसे छीनने में मदद कर रही थी। अंधेरा मुझे लुट जाने के लिए प्रेरित कर रहा था। किसे पता चलेगा? फिर प्राब्लम क्या है? रुकना किस लिए? अंधेरा मेरी इच्छा के विरुध्द मेरी मदद कर मुझे छल रहा था। अंधेरा उसे भी छल रहा था क्योंकि मैं उसकी मोना नहीं थी, मगर उसकी मदद भी कर रहा था क्योंकि उसने मुझे निश्चिंत करके मुझको उसे उपलब्ध करा दिया था। कुंवारी लड़की की सबसे अनमोल चीज। कितनी बड़ी भेंट वह अनजाने में पा रहा था ! जानते हुए में क्या मैं उसे हाथ भी लगाने देती! हाथ लगाना तो दूर अपने से बात करने के लिए भी तरसाती। मगर अनजाना होनेपर मैं क्या कर रही थी। वह मेरा कौमार्य भंग कर रहा था और मैं सहयोग कर रही थी।

उसका लिंग मेरी योनि के मुँह पर दस्तक दे रहा था।

एक घक्का लगा और उसका शिश्न थोड़ा और भीतर धँस गया। छेद मानो खिंचकर फटने लगी। मैं दर्द से बिलबिला उठी। जोर लगाकर उसे हटाना चाहा मगर खुद को छुड़ा नहीं पाई। ऊपर वह मुझे कंधों से जकड़े हुए था और नीचे मेरे पैरों को मोड़कर सामने से अपने पैरों से चाँपे था। छूटती किस तरह! उसने और जोर से दबाया। आह, मैं मर जाउंगी। शिश्न की मोटी गर्दन कील की तरह छेद में धँस गई। वह ठहर गया। शायद छेद को फैलने के लिए समय दे रहा था। मैंने उसे बगलों से पकड़कर ठेलकर छुड़ाने की कोशिश की। मगर सफलता नहीं मिली। वह कसकर मुझे जकड़े था। कोई उपाय नहीं। कोई सहायता नहीं। बुरी तरह फँसी हुई थी।

वह उसी दशा में रुका था। कुछ देर में योनि के खिंचाव का दर्द कुछ कम होने लगा। हल्की सी राहत मिली। झेल पाने की हिम्मत बंधी। मगर तभी एक जोरदार धक्का आया और धक्के के जोर से मेरा सारा बदन ऊपर ठेला गया। शिश्न मुझे लगभग फाड़ते हुए मेरे अंदर घुस गया। मैं दर्द से चीख उठी मगर उसने मेरा मुँह बंद कर आवाज अंदर ही घोंट दी। वह बेरहम हो रहा था। लगा आज वह मुझे मार ही डालेगा। जिस तरह कुल्हाड़ी लकड़ी को फाड़ती है उसी तरह मैं फटी जा रही थी। वह मुझे छटपटाने भी नहीं दे रहा था। हर तरफ से जकड़े था। मुँह पर हाथ दबाए था और नीचे दोनों पाँव जुड़े हुए उसके पैरों से मेरे नितम्बों पर दबे थे। उपर से कंधे जकडे था। हिलना भी मुश्किल था। अब वह कोई दया दिखाने को तैयार नहीं था। छेद पर अपना दवाब बढ़ाता जा रहा था। कील धीरे धीरे मुझमें ठुकती जा रही थी। शिश्न मेरे काफी अंदर घुस चुका था। योनि के चिकने गीलेपन में वह भीतर सरकता ही जा रहा था। मैं दर्द से व्याकुल हो रही थी। नश्तर की एक धार मुझे चीरती जा रही थी। छोड़ दो छोड़ दो। मगर मुँह बंधे जानवर की तरह मेरी उम… उम…. की आवाज भीतर ही घुट रही थी।

उस सुरंग में सरकते हुए उसका शिश्न मानो किसी रुकावट से टकराया। कोई चीज दीवार की तरह उसका रास्ता रोक रही थी। वह चीज उसके नोंक के दबाव में खिँचती हुई भी आगे बढ़ने नहीं दे रही थी। मेरे भीतर मानों फटा जा रहा था। उसने बेरहमी से और जोर लगाया। भीतर का पर्दा मानों फटने लगा। दर्द की इन्तहा हो गई। मैंने जांघें भींच लीं। किस तरह छुड़ाऊँ। कई तरफ से जोर लगाया। मगर कुछ कर नहीं पाई। रस्सी से बंधे बकरे की तरह हलाल हो रही थी। विवशता में रो पड़ी। सिर्फ जांघों को भींचकर खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी। मगर जांघ तो फैले थे। भींचने की कोशिश में छेद और सख्त हो रही थी, उससे और पीड़ा हो रही थी।

शायद उसे मुझपर तरस आया। उसने मेरे बहते आँसुओं पर अपने होंट रख दिए। मुझे उस दर्द में भी उसपर दया आई। यह आदमी फिर भी क्रूर नहीं है। मेरा दर्द समझ रहा है। उसने सारे आँसू चूस लिये। मेरी बंद पलकों पर जीभ फिराकर उन्हें भी सुखा दिया। कैसा विरोधाभास था! नीचे से लिंग की कठोर, जान निकाल देनेवाली क्रूरता, उपर से उसकी जीभ का कोमल सहानुभूतिभरा सांत्वनादायी प्यार। उसने मेरे चिड़िया की तरह अधखुले मुँह पर बार बार चुम्बन की मुहर लगाई। फिर ठुड्डी को, गले को, कॉलर की हड्डी को चूमता हुआ नीचे उतरा और प्रतीक्षा में फुरफुराती मेरी बाईं चूची को होंठों में अंदर गर्म घेरे में ले लिया। फिर मेरे दाएँ कंधे के नीचे से हाथ निकालकर मेरी प्रतीक्षारता दूसरी चूची को चुटकी में पकड़कर मसलने लगा। नीचे तड़तड़ाहट के दर्द के बावजूद आनंद की लहरें मुझमें दौड़ने लगीं। एक तरफ दर्द और दूसरे तरफ आनंद की लहर। किधर जाऊँ! एक तड़पा रही थी, दूसरी ललचा रही थी। कुछ क्षण आनंद के हिचकोले मुझे झुलाते रहे और उन हिचकोलों में चुभन की पीड़ा भी कुछ मध्दिम होती सी प्रतीत हुई। हालांकि वह मुझमें उतना ही घुसा हुआ था।

“मोना आई लव यू… आई लव यू ….” वह नीचे चूचियों को चूसते हुए वहीं से बुदबुदाया। ‘मोना!’ हाँ, मैं रिया नहीं मोना थी। उसके लिए मोना। संवेदनों की तेज सनसनाहट में मैं भूल गई थी कि मैं मोना नहीं रिया थी। वह इतना प्यार मुझपर बरसा रहा था कोई और समझकर। मुझे पछतावा हुआ। इच्छा हुई उसे बता दूं। मगर आनंद और दर्द की लहरों में यह खयाल मुझे निरर्थक लगा। जो कुछ मैं भोग रही थी, जो आनंद, जो दर्द मुझे मिल रहा था उसमें इससे क्या फर्क पड़ता था मैं कौन हूँ। वह भोगना ही था। वह स्त्री देह की अनिवार्य नियति थी। कोई और राह नहीं थी। नीचे उस अनजान अतिथि को मेरी योनि अपनी पहचान के रस में डुबोकर भीतर बुला ही चुकी थी। अब क्या बाकी रहा था?

और तभी ऑंखों के आगे चिनगारियाँ सी छूटीं और मैं बेसम्हाल उठी दर्द की लहर में बेहोश सी हो गई। ‘धचाक’..! उसने शिश्न को थोड़ा बाहर खींचा था। मैंने सोचा वह हमदर्दी में ऐसा कर रहा है, इसलिए ढीली पड़ी थी। मगर तभी एक बेहद जोर का धक्का लगा और मेरी ऑंखों के आगे तारे नाच गए। वह मुझे फाड़ते हुए मुझमें दाखिल हो गया। मैं खुद को भींच भी नहीं पाई थी कि उसे रोक सकूँ। मेरी साँस रुक गई। मैं बिलबिला उठी। आ ..ऽ ..ऽ ..ऽ.. ह ….. आ ..ऽ ..ऽ ..ऽ ह ….. छोड़ो मुझे, छोड़ों मुझे … वह जैसे ठहर कर मेरी छटपटाहट का आनंद ले रहा था। कोई दया नहीं। शिकारी जैसे अपने शिकार को तड़पते देख रहा था। मगर उसने मुझे दर्द की लहर से उबरने का मौका नहीं दिया। अभी ठीक से साँस लेने भी नहीं पाई थी कि दूसरा वार हुआ। एक और जोर का धक्का आया और वह एक गर्म सलाख की तरह मुझमें जड़ तक धँस गया। मेरा कलेजा मुँह को आ गया। उसका छोर मानो मेरे कलेजे तक घुस गया था।

कील पूरी तरह ठुक चुकी थी और उसमें भिदकर मेरा कौमार्य एक तितली की भांति तड़प तड़पकर दम तोड़ चुका था, खत्म हो चुका था। अब वह कभी वापस नहीं लौट सकता था। इस जीवन में अब कभी नहीं। मैं ग्लानि से भर उठी। जो इतना अनमोल, इतना सहेजकर रखा था उसे यूँ ही सस्ते में बिना मोल के ही खो दिया था। उसे कभी वापस नहीं पा सकूंगी। मुझे बहुत कसकर अपनी बेहद कीमती चीज के खो जाने का एहसास हुआ। मैं फफक पड़ी।

”डार्लिंग, हो गया, बस… बस, इतना ही।” वह मुझे सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था। ‘इतना ही!’ यह क्या कम है? ”अब और कुछ नहीं होगा। बस इतना ही सहना था।” वह मुझे सहलाने लगा था – कंधों को, बगलों को, नर्म छातियों को। ”पहली बार थोड़ा सहना पड़ता है। इसके बाद कभी दर्द नहीं होगा।” आश्वासन का मरहम लगाकर उस दर्द को शांत करने की कोशिश कर रहा था जो मेरी जांघों के जोड़ से बहुत भीतर मर्म तक दहकती आग जैसी जलन से उत्पन्न हो रहा था। उसका हाथ बहुत हौले हौले घूम रहा था, मसलने से दुख रही नाजुक चूचियों पर, तेज साँस में ऊपर नीचे होते नर्म पेट पर, उसके नीचे धड़कते फूले मांसल पेड़ू पर। वह सांत्वना दे रहा था – जांघों पर, घुटनों पर, पैरों पर, कोमल तलवों पर, वहाँ से उतर कर सँकरी कमर पर, उपर क्रमश: चौड़े होते धड पर। हर जगह घूमता हुआ वह मानो मेरा दर्द खींच रहा था।

सांत्वना की सहलाहटें, स्पर्श, आश्वासन बरसाते चुम्बन धीरे धीरे असर कर रहे थे। उस आग की जलन कुछ कुछ घट रही थी। हालाँकि दर्द अब भी बहुत था। मगर उसके प्यार का बल पाकर सहने की ताकत आ रही थी। बिल्कुल औरत की तरह जो मर्द के प्यार के बल पर बड़े बड़े दर्द सह जाती है। मैं अब औरत बन गई थी। मगर क्या वह मेरा मर्द था?

एक दिया-सा जल रहा था। मैं जल रही थी। जलन मेरे जांघों के बीच हो रही थी जहाँ उसकी विजय पताका पूरे जोश से फहरा रही थी जिसका खंभा मेरे गर्भ तक बेधता हुआ गड़ा हुआ था। मैं उसकी आरती में दिए-सी असहाय जल रही थी। हारी हुई, विवश जलन। जलन मेरे भीतर हो रही थी। हालाँकि योनि की जलन अब घट रही थी। इसमें उसका दोष नहीं था, मैंने खुद इसे चुना था, मोना बनकर।

उसका शिश्न मेरे भीतर हिला। इस बार दर्द नहीं हुआ। वह थोड़ा बाहर निकला और फिर बिना किसी खास बाधा के घुस गया। गर्भ के मुँह पर दस्तक पड़ी। डरकर फिर मैंने साँस रोक ली। मगर कुछ खास दर्द नहीं हुआ। वह कुछ ठहरकर फिर थोड़ा बाहर सरका। पहले से ज्यादा। उसके साथ उसके लिंग पर कसी मेरी योनि की दीवारें बाहर की ओर खिंच गई। मेरी भीतरी कोमल नितम्बों पर दबाव पड़ा और वह मोटा शिश्न मेरे अंदर रगड़ता हुआ फिर भीतर पैठ गया। अब मेरी योनि फैल रही थी। वह धीरे धीरे धक्के देने लगा। इस बार दर्द थोड़ा कम हुआ। मेरा भय घटा। अब सह सकूंगी। धीरे धीरे धक्कों का जोर बढ़ने लगा। उसका शिश्न मेरी पिच्छल सुरंग में जोर जोर रगडता फिसलने लगा। वह बाहर भीतर हो रहा था और योनि के संकुचन की रही सही सलवटें मिटा रहा था। मैं सह रही थी। पहली बार फैली योनि की तड़तड़ाहट बरकरार थी। फिर भी उसके धीरज और कोमलता से पेश आने पर मुझे दया आई। सहानुभूति में ही मैंने उसके धक्के से मिलने के लिए अपने नितम्ब उचकाए। वह उत्साह से भर गया। और जोर जोर धक्के लगाने लगा। मेरी योनि में दर्द के बीच भी आनंद की हल्की तरंगें उठने लगी। वह और जोर जोर से धक्के मारने लगा। उसका शिश्न मेरे छेद के मुँह तक आता और फिर सरसराकर भीतर घुस जाता। जब बाहर निकलता तो राहत मिलती और भीतर जाता तो दर्द होता, हालाँकि पहली बार की तरह असह्य नहीं।

वह हाँफ रहा था। उसके बदन पर घूमते मेरे हाथ उसके पसीने से गीले हो रहे थे। वह जोर जोर से धक्के मार रहा था। मैं भी हाँफ रही थी। दर्द को भुलाने के लिए कभी उसकी पीठ पर हाथ पटकती, कभी नितम्ब उचकाती। इसे वह मेरा मजा आना समझ रहा था। वह और सक्रिय हुआ, और जल्दी जल्दी करने लगा। उसके मुँह से एक घुटी-सी कराह निकली … आ ..ऽ … ह … और उसने मुझे जोर से भींच लिया। कसाव में मेरी हड्डियाँ चटखने लगीं। मुझे अपने भीतर उसके शिश्न के झटके से फैलने-सिकुड़ने का एहसास हुआ। हर झटके में मेरे भीतर एक गर्म लावा-सा भरने लगा। आ ..ऽ ..ऽ ..ऽ ह … ओ ..ऽ..ऽ..ऽ..ह… वह झड़ रहा था और मेरे भीतर उसकी गर्म धार भरती जा रही थी। वह मुझमें बार बार झड़ रहा था। बाढ़ की तरह उसने मुझे भर दिया। उस गर्म धार में मेरी योनि, मेरा फूला पेडू भींग गए। आसपास के बाल भींगकर चमड़ी में चिपक गए। मुझे भी झड़ने की जरूरत महसूस हो रही थी। मगर दर्द भी हो रहा था। पहली बार होने का दर्द। मैंने उसे सहलाया और फिर उसके मुँह को चूम लिया। पता नहीं क्यों मुझे एक कृतज्ञता-सी महसूस हुई, हालाँकि उसने चोर की तरह छुपकर मुझे विवश करके मेरा शील भंग किया था। मगर फिर भी मैंने उसकी धार में पहला स्नान किया था।

वह उठा। लबालब भरी योनि से बहते लिसलिसे द्रव को छेद पर से, दरार में से, नीचे गुदा के छेद पर से, ऊपर चूत पर से पोंछा और मुझपर से उतर गया। मैंने भी अपनी पैंटी, अपनी शलवार खींची और ब्रा और फ्रॉक को टटोलकर उठाया और बाथरूम में चली गई। अब सब कुछ समाप्त हो गया था।

बाथरूम की रोशनी में मुझे शलवार पर और फ्राक पर खून के धब्बे नजर आए।

धो पोंछकर जब निकली तो मैंने अंधेरे में ही बिस्तर पर उसकी आहट लेने की कोशिश की। गहरी साँसों के आने जाने की आवाज आ रही थी। वह सो रहा था। अच्छा है। जब मोना सोने आएगी तो समझेगी। मैं दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई।

——–समाप्त——–

वो अनुभव मुझे हमेशा याद रहता है। आज भी खुद से पूछती हूँ की वो कौन था? ये भी की मैं कौन थी? इन stranger sex stories के बारे में कमेंट्स कीजिये..



loading...

और कहानिया

loading...


Online porn video at mobile phone


maa we sadi sexy kahsni.comcoti bahan ki cudai ghumne me ki sae kahanisavita bhabhi ki hindi kahaninonvagestory.comgori bacchi or samli bacchi ma sexi kon hoti hai.comलेस्बियन सेक्स स्टोरी इन हिंदीxvideos.bacha utth gayaBHEN KI NANGI PEEThindi khule me chudai kahani and nude photo.comसेकसी बुर चुदई कहानी कुमारी kutey se chudwati hu roj kahaniyamarwadi maa xxx kahanibahi behen ki hinadi sixey hot kahani video you tarabantervasna khaniyaGAON MAIN RISTON MAIN CUDAI KI LAMBI KAHANIsasur bahu malish aur chudai hindi kahanian with picsबियफ सेकसी चुदाई रिसतो मॅBAHAN BHANJI KI CHUDAYxxx.sister.khinya.hindi.2018newsex khani boos ne or mene maa or bhen ko chodaनयी चोद कहानीristo me kamuktasath me. bahenchoda videosmama ne bhanji ko coda xxxx movehindsexkhanedeshi sexy storiy koi dekh raha hai Moti bahan ki xxx hindi story andvphotosanti ko bdsm sax pasand he khanixxx hinde khaniya dot comsarabi papa ne paiso ke liye chudwaya sabkoGOA KI CAL GRL KI CHUDAI KI STORY HINDI MExnxx Punjabi foja mai Biwi Mauj meinरात दिन नग रख कर चोदाsex 2050 kahni gals ko dogi ne chodibiwi ko chudwaya stranger se kahanimom ki chudai anjane me real videoसेक्सी कहानियां बाप bhanjiदामाद ने सास को नंगा कर के खूब चोदा ईबीयनfriend ke sath chudai ki kahani in hindibur me teldalke chudai kahani hindi memaa sexy story. yumpeshab kamuktaHindi sekasi satoriमां और मोसी की गाली वाली चुदाई की कहानीcomविडीयो सेक्सी हिन्दी मे भाभी को जबरजसती गाड मे तेल लगाकर चोदाkamvasna bibhiindean auntie wife को छत पर चोदा videosxxx kahane write in hende mast ramsexi khaniuncle ne randi bnaya khanibua ki jhantwali fati bur ki photuSEX RANI KAHANI SAGI BHABHIkamtkta khane comदीदी से सेक्स हिंदी में बात कहानी98indiansexmastram chudhi jo ander tk gram kr da hindi khanisdx rani storiप्यार से चुदायी तक की कहानीchto mere pati xxx kahaniमाँ बहन लेसिबिन सेक्स कथाxxx stori padane liyeग्रहणी ओल्ड सेक्स HDटेलर ने नाप लेते लेते कि चुदाइ xxx video downdldoXNXX SEX लङकीsexi hindi story bhuda land masaltaमैडम एक लडके चुत.x nxx comhindi ma saxe khaneyaचूत कैसे मारी जाती हैnokarani ke gand mare urdu story desibahu oralsex kahanisex stori budde and bhabhi nanad antrvaanaपति ने ही चुदवाया कहानियां randi bn k chudwaya. kahanisex story of bhai behanमस्तराम के कमशिन चुद कि चुदाइ के किस्सेbehan ko patni banayabhan bhai bus sexy storiesantarvasna storiesmere palagn pe devar ka dam xxx kahaniमासूम चूत को फाडाANTRAVASANA MAA KI CHUT MARI BETE NEमुंबइ कि चूटGay jija or didi ki chudaiGAON MAIN RISTON MAIN CUDAI KI LAMBI KAHANIbheek mangne wali ki jabardasti chudai video sexysxey khanedidi ko uske sasural me jake chodaमस्तराम डॉटकॉमcg dehati devar ne cgoda sex kahaniबेटी कि गुलाबी चुत को बाप ने चोदी विडियो